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उंगलिमाल और गौतम बुद्ध की कहानी

उंगलिमाल और गौतम बुद्ध की कहानी

गौतम बुध की बहुत सारी कहानियां आपने सुनी होगी आज जिस कहानी को हम आपको सुना रहे हैं वह कहानी डाकू उंगलिमाल और गौतम बुध की हैं जिसमें गौतम बहुत किस तरह से एक खूंखार डाकू को एक अच्छे इंसान में परिवर्तित कर देते हैं जिस डाकू के सामने लोग जाने से डरते थे और लोग हमेशा उस खतरनाक डाकू से दूर ही रहते थे उस डाकू को गौतम बुध ने किस तरह से धर्म के मार्ग पर लाया
किसी जंगल में एक उंगलिमाल डाकू रहता था जो की बहुत ही खतरनाक था डाकू बनने से पहले वह एक आम इंसान था लेकिन उसको गांव वाला उसे बहुत सताता था वह एक दिन गांव वाले से बदला लेने के लिए उसने एक सौ एक जन को मारने का प्रतिज्ञा ले लिया और कहीं जंगल में जाकर रहने लगा और वह इतना खतरनाक हो गया कि उसके रास्ते में जो भी आते थे वह उसको मार कर उसके अंगूठे को काटकर अपने गले में माला बना कर पहनते था। एक दिन गौतम बुध उसी रास्ते से जा रहे थे तभी उनके शिष्य में उन्हें वहां जाने से मना कर दिया उन्हें उस उंगली मार डाकू के बारे में बताया और बोला कि वहा मत जाइए। गौतम बुद्ध बोले अगर मैं नहीं जाऊंगा तो और कौन जाएगा वह मुझे मार डालेगा और मैं मृत्यु से नहीं डरता हूं अगर किसी इंसान के कारण मैं आगे चलना छोड़ दूं तो मेरा गुरु होने का क्या मतलब है उसे मेरी जरूरत है। गौतम बुध किसी का बात ना सुनकर वह जंगल में चले गए वह डाकू एक चट्टान पर बैठा हुआ था उसने देखा कि कोई इंसान उसके ओर चला आ रहा है वह बहुत खुश हुआ उसका प्रतिज्ञा पूर्ण होने वाला था उसने एक सौ का मार चुका था अब सिर्फ एक को मारना बाकी था महात्मा बुध उनकी और चले जा रहे थे चलते चलते बिना डाकू को देखें उसके सामने से गुजर गए डाकू हैरान हो गया कि लोग मुझसे डर के मारे आसपास भी नहीं भटकते हैं और यह इंसान देखो मुस्कुराते हुए मेरे सामने से चालें जा रहा है उसे बहुत ही क्रोध आया वह चट्टान से खुद कर सीधे गौतम बुध के सामने गया और बोला तुम जानते हो हम कौन हैं क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा है आज तूम्हारी मृत्यु होने वाली है क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा। गौतम बुध बिना उसका जवाब दीजिए वह चले जा रहे थे गौतम बुद्ध बोले मैं बहुत पहले रुक चुका हूं अब तुम रुक जाओ वह सोच में पड़ गया कि चले तो यह जा रहा है और रुकने मुझे बोल रहा है डाकू बोला तुम पागल हो क्या चले तुम जा रहे हो रुकने मुझे बोल रहे हो डाकू को लगा यह सच में पागल है डाकू ने फिर से रुकने को कहा। गौतम बुद्ध ने उसे वही उत्तर दिया उस डाकू को कुछ समझ नहीं आ रहा था ये मुझे रुकने को क्यों बोल रहा है। गौतम जी रुक गये और उससे बोले मुझे मृत्यु का डर नहीं है मैं अपने जीवन में सब कुछ पा चुका हूं तो मैं कहां जाऊं गा। जा तो तुम रहे हो अधर्म के मार्ग पर जो इतने लोगों को हत्या कर दी । डाकू यह बात सुनकर गौतम बुध को मारने का मन नहीं कर रहा था क्योंकि उसे आनंद नहीं आ रहा था उसे लोगो को मारने में तब मजा आता था जब कोई उससे डरता था डाकू गौतम बुद्ध के बात से बहुत प्रभावित हुआ। गौतम बुद्ध यह समझ चुके थे डाकू उनका बात मान रहा मतलब इसका ह्रदय परिवर्तन हो रही थी । गौतम बुद्ध डाकू को बोले  तुम एक काम करो तुम उस पेड़ का डाली को काट कर लाओ डाकू ने बिल्कुल वैसे किया डाली को काट के ले आया। फिर गौतम बुध बोले अब जाकर डाली को जोड़ आओ डाकू बोला यह संभव नहीं है यह असंभव है यह दोबारा नहीं जुड़ सकता है। गौतम बुध मुझे मैं तुम्हें यही तो समझाना चाह रहा हूं कि काटना आसान है लेकिन उसे दोबारा जोड़ना असंभव है तो तुम भी तो यही कर रहे हो लोगों को मार रहे हो जबकि तुम मरे हुए व्यक्ति को दोबारा जीवित नहीं कर सकते । गौतम बुध बोले क्या तुम्हें पता है जिसको तुम मारते हो उसको कोई एक छन ही होता है लेकिन उसके परिवार कब दुखों का पहाड़ टूट जाता है क्या तुम इस बात का एहसास है यह सुनकर डाकू का हिर्दय विचलित हो उठा और ऐसा ऐसा ऐसा क्यों कितना गलत कर रहा है और गौतम बुध के चरणों गिर गए गौतम बुध उसे शिष्य के रूप में स्वीकार की। उसे भिक्षा मांगने भेज दिए डाकू जो कि एक संत बन चुका था वह भी भिक्षा में गांव में गया जो लोगों का जो परिवार को डाकू ने मारा था वह सभी लोग मिलकर डाकू पर ईंटे-  पत्थर बरसाना शुरू कर दिया। डाकू लहूलुहान हो गया कुछ देर बाद गौतम बुद्ध आए और पत्थर बरसाने वाले को रोका बोला डाकू तो कब का मर चुका है या जो इंसान है यह मेरे शरण में आया हुआ है इसने शांति का मार्ग अपना लिया। क्या तुम लोग इसे पत्थर से मार कर फिर से डाकू बनाना चाहते हो बात सुनकर लोग शांत हो गए आपने अपने घर चले इस तरह से गौतम बुद्ध ने एक डाकू को हृदय परिवर्तन किया।
 इस कहानी से हमें लोगों को क्या सिख मिलती है

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन किसी का बुरा नहीं करना चाहिए क्योंकि हम बड़ी आसानी से बुरा काम तो कर देते हैं लेकिन उससे ठीक करना बहुत ही मुश्किल होता है ना जाने हमारे एक अपराध के कारण कितने लोगों को दुख भुगतना पड़ता है हमें जीवन में कभी भी गलत काम या ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे कि कोई दूसरे इंसान को तकलीफ हो। बुरा व्यक्ति बनना आसान है लेकिन अच्छा व्यक्ति बनना उतना ही मुश्किल यदि एक अच्छे व्यक्ति बुरा तो बन सकता है लेकिन वही बुरा व्यक्ति जल्दी अच्छा व्यक्ति नहीं बन सकता. इसलिए आप लोग हमेशा सच्चे एवं अच्छे व्यक्ति बनकर रहे।