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एक लड़के कि कहानी

एक लड़के कि कहानी | Ek ladke ki kahani

एक लड़के कि कहानी​

एक गांव में एक बूढ़ी औरत और उसका पौधा रहता था। उसका पोता का नाम धीरज था वह दिखने में बहुत लंबा और सुंदर था उसका उम्र 20 वर्ष था अच्छा संगीत गाता था वह बहुत बड़ा गायक बनना चाहता था। लेकिन धीरज के दादी चाहती थी कि धीरज अपने दादाजी की तरह सैनिक बने जो कि अपने देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया। उन्होंने अपने जीवन में बहुत बीरता का मेडल जीते थे जो की दादी ने संभाल के रखे थे। और अपने पति का वीरता की कहानी हमेशा अपने पोता धीरज को सुनाती। किंतु धीरज को सैनिक बनने में कोई रुचि नहीं थी लेकिन दादी ने हमेशा कहते तुम एक सैनिक बनाओ और धीरज उनकी बात को टाल देता।
एक दिन दादी ने धीरज को कह दिया कि धीरज मेरी आखिरी इच्छा है कि तुम भी अपने दादाजी की तरह एक सैनिक बनो बात करने के लिए यू ही हां बोल दिया राशन कार्ड आदि का खुशी का ठिकाना नहीं था। वह पूरे गांव को बताते चल देगी उसका फोटो एक बहादुर सैनिक बनेगा बिल्कुल अपने दादा यह की तरह वह भी एक बंदूक अपने कंधे पर रखेगा सैनिक के कपड़ों में वह बहुत अच्छा दिखेगा और देश की रक्षा करेगा यह सब बोल कर वह बहुत खुश होती। अंत धीरज को सैनिक बनना ही पड़ा उसकी दादी अपने पोते को सैनिक के कपड़ों में देखकर बहुत खुश हुई फिर धीरज अपने दादी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया और चला गया।
दो साल बाद दादी के पास एक चिट्ठी आई उसमें लिखा था कि उसका पोता कल वापस आ रहा है यह सुनकर दादी बहुत खुश हुई और वह सोचने लगे कि मेरा पोता सैनी के कपड़ों में और गले में मेडल लेकर कितना सुंदर लगेगा। फिर सुबह दरवाजे पर दस्तक आया दादी ने दरवाजा खोला तो देखें एक लड़का उसके दरवाजे पर खड़ा है और उसका हालत बहुत खराब है उसका एक आंख होता हुआ और चेहरा जला हुआ समझ नहीं आ रहा है और उसका एक पैर कटा हुआ है और कमर में एक लोहे का रोड लगा हुआ है जैसे मानो उसका कमर टूट गया हो और वह लड़का एक लाठी के सहारे खड़ा है और उनका पैर छूने का कोशिश कर रहा है उनको कुछ समझ नहीं आ रहा था उन्होंने पूछा तुम उस लड़के ने बोलो मैं आपका पोता धीरज हूं। यह सुनकर दादी हैरान हो गई उस लड़के का हालत देखकर और उन्हें यकीन नहीं हो रहा था लड़का का पोता है केसर कैसे हो गया एक युद्ध के दौरान हुआ पैर में गोली लगने के कारण पैर काटना पड़ा और बम के हमले में उसका चेहरा जल गया दादी को यकीन नहीं हो रहा था यह सब हो गया। धीरज की आंखों में अपने दादी से नाराजगी साफ-साफ देखा जा सकता था कि वह सैनिक नहीं बनना चाहता था लेकिन दादी के कारण उसे बनना पड़ा और उसकी यह सब हालत हो गया। धीरज ने अपने जेब से मैटर निकाला और अपनी दादी के हाथ में रख दिया । सैनिक की कुर्बानी को सिर्फ एक मेडल नहीं भरपाई कर सकता सैनिक हमारे लिए बहुत कुछ कुर्बानी देते हैं।