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क्या हुआ था जब महाभारत युद्ध के बाद अर्जुन रथ पर हस्तिनापुर जा रहा थे

 
महाभारत केई कहानियां हैं जिसमें कृष्ण भगवान ने महाभारत के द्वारा सभी को कुछ ना कुछ संदेश दे गए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि जब अर्जुन घमंड हो जाता है और महाभारत का युद्ध विजयकर वापस हस्तिनापुर जा रहे थे तो उनके साथ क्या-क्या हुआ और अर्जुन का क्या-क्या प्रश्न रहा और कृष्ण भगवान ने उन्हें क्या-क्या उत्तर बताया जिससे अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ शक्तिशाली योद्धा होने का घमंड चकनाचूर हो गया  इस कहानी में आपको सीखने को बहुत कुछ मिलेगा जिसे आप अपने जीवन में उतार सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर तरीके से जी सकें

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अर्जुन रथ पर हस्तिनापुर जा रहा थे

 महाभारत युद्ध के पश्चात जब अर्जुन विजय होकर कृष्ण भगवान के साथ अपने दिव्य रथ में हस्तिनापुर वापस जा रहे थे दिव्य रथ जो कि चमचमाते हुआ सुनहरा और शक्तिशाली रथ था इस रथ को देवताओं की ओर से अर्जुन को युद्ध के लिए भेंट दिया गया था ताकि दुश्मनो की ओर से चलने वाले दिव्यास्त्र को सहने के लिए और सत्य की बिजय हो और पापियों का नाश हो. दिव्य रथ जो कि अर्जुन की शोभा बढ़ा रही थी और अर्जुन प्रसन्न होकर अपने ही रथ में सवार होकर सभी के समक्ष अपना शौर्य बढ़ाना चाहते थे ताकि सबको लगे कि अर्जुन एक बहुत बड़ा महारथी हैं जो कि युद्ध में सभी महाबली जैसे लोगों को परास्त कर जैसे कर्ण, दुर्योधन, द्रोणाचार्य ,महामाई भीष्म आदि सभी को  परास्त किया और अपने शान से दिव्य रथ पर सवार होकर किष्किंधा की ओर प्रस्थान कर रहा थे

इसके बाद कृष्ण भगवान ने क्या कहा

जब अर्जुन प्रस्थान कर रहे थे कृष्ण भगवान ने रथ को रोककर अर्जुन को नीचे उतरने को कहा अर्जुन हैरान हो गया कि भला इस दिव्य रथ में क्या बाधा उत्पन्न हो गया जो कि कृष्ण भगवान उनको उतरने को कह रहे हैं फिर अर्जुन ने कृष्ण भगवान से पूछा क्या बात है माधव आप मुझे इस रथ से उतरने को क्यों कह रहे हैं कृष्ण भगवान ने कहां यदि तुम अपना प्राण बचाना चाहते हो तो नीचे उतरो उसके बाद तुम्हारे सारे प्रश्न के उत्तर मिल जाएंगे अर्जुन जैसे ही रथ से नीचे उतरा उसके बाद कृष्ण भगवान रथ से उतर गए और अर्जुन ने फिर से प्रश्न पूछा लेकिन कृष्ण भगवान ने कोई उत्तर नहीं दिया

क्या हुआ जब हनुमान जी रथ से नीचे उतरे

कृष्ण भगवान हनुमान जी का नाम लेकर उन्हें पुकारा अर्जुन को आश्चर्य हुआ कृष्ण भगवान से पूछा कि हम दोनों के अलावा और यहां तो कोई नहीं है तो आप किसको उतरने को कह रहे हैं कृष्ण भगवान मुस्कुराते हुए हनुमान जी को नीचे उतरने को कहते हैं और जैसे ही हनुमान जी नीचे उतरते हैं तभी दिव्य रथ जलकर भस्म हो जाता है यह देख कर अर्जुन को हैरानी होती है कि यह सब कैसे क्या हो गया और कृष्ण भगवान अर्जुन पूछता है कि इस दिव्य रथ को जलने का क्या कारण है और भगवान श्री कृष्ण उत्तर देते हुए कहते हैं की यह दिव्य रथ तो बहुत ही पहले ही जल चुका था जब सभी महाबली योद्धा दिव्यास्त्र का प्रयोग तुम्हारे ओर वार कर रहे थे तभी दिव्यास्त्र के प्रभाव से यह दिव्य रथ भस्म होकर गायब हो जाता लेकिन हनुमान जी तुम्हारे रथ के ऊपर ध्वज पर बैठे हुए थे और स्वयं मैं भी तुम्हारे रथ पर विराजमान था इसीलिए यह रथ जब तक भस्म नहीं हुआ था‌ और इसीलिए मैं पहले तुम्हें  उतरने को कहा ताकि तुम्हें कोई नुकसान ना हो. जब मैं और महाबली हनुमान जी तुम्हारे रथ से नीचे उतरे तो इस यह रथ जलकर भस्म हो गया

अर्जुन का घमंड टूट गया

अर्जुन कृष्ण भगवान के चरणों में जाकर उनसे क्षमा मांगे कि वह कुछ ज्यादा ही घमंड कर चुके थे अपने बल एवं बुद्धि पर वह सोचते थे कि वही सर्वश्रेष्ठ शक्तिशाली योद्धा थे जो सभी को परास्त कर विजय हुए लेकिन कृष्ण भगवान अर्जुन को कहते हैं की इस युद्ध में तुम सर्वश्रेष्ठ योद्धा नहीं थे तुमसे भी ज्यादा पराक्रमी योद्धा युद्ध के मैदान में था जो अपने शक्तिशाली वानों से तुम्हारे रथ को कुछ हाथ पीछे धकेल देता था अर्जुन कहते हैं की आप करके बात कर रहे हैं जब कर्ण मेरे ऊपर वाण चलाता था तो मेरा रथ कुछ हाथों पीछे जाता था लेकिन जब मैं वाण चलाता था तो कर्ण का राथ कई कोस दूर चला जाता था तो बताइए माधव कि मैं बड़ा शक्तिशाली योद्धा हो या फिर कर्ण. कृष्ण भगवान मुस्कुरा कर कहते हैं कि इसमें कोई संदेह ही नहीं है कि तुम शक्तिशाली योद्धा हो लेकिन तुम से भी ज्यादा शक्तिशाली ज्यादा कर्ण है अर्जुन हैरानी से पूछता है यह आप क्या कह रहे हैं आप मुझे स्पष्ट रूप से बताइए तो कृष्ण भगवान कर्ण की प्रशंसा करते हुए अर्जुन को जवाब देते हैं कि तुम्हारे रथ पर स्वयं मै वासुदेव कृष्ण तीनों लोग का भार लेकर बैठा हुआ था और महाबली हनुमान भी तुम्हारे रथ के ध्वज पर बैठे हुए थे तुम बताओ अर्जुन जिस रथ पर मैं विराजमान रहता हूं उसे रथ को अगर कोई थोड़ी सी भी पीछे धकेल दे तो क्या उसका शक्ति प्रशंसा के योग्य नहीं है और अर्जुन यह मत भूलो कि कर्ण भगवान परशुराम का शिष्य था जोकि तुम्हारे गुरु के भी गुरु थे अगर कर्ण से छलकर उसके कवच और कुंडल नहीं मांगा जाता तो कर्ण को तुम तो क्या उसे कोई नहीं हरा सकता था कवच और कुंडल के साथ उसे हराना असंभव था और यह भी मत भूलो की कितनी बार मैं स्वयं तुम्हें कर्ण के बणो से रक्षा किया हूं इसलिए तुम में और कर्ण में शक्तिशाली कौन है इसका उत्तर ‌निसंदेह कर्ण ज्यादा शक्तिशाली है अर्जुन का यह एहसास हो गया कि महाभारत के युद्ध में उससे भी ज्यादा शक्तिशाली योद्धा थे और अपने घमंड को छोड़कर कृष्ण भगवान के चरणों में जाकर उन्हें प्रणाम करता है और उनसे क्षमा याचना करते हैं कृष्ण भगवान अर्जुन को क्षमाकर देते हैं। और अर्जुन को कहते हैं जो व्यक्ति घमंड करता है उसका घमंड एक ना एक दिन चुर ही जाता है