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गुरु और शिष्य की कहानी

गुरु और शिष्य की कहानी | Guru aur sisha ki kahani

गुरु और शिष्य की कहानी

एक रात की बात है गुरु और शिष्य जंगल के रास्ते से अपने घर जा रहे थे लेकिन काफी रात हो चुकी थी और दोनों ही थक चुके थे फिर किसने बोला गुरूजी काफी रात हो चुका है हम यहीं कहीं विश्राम कर लेते हैं गुरुजी बोले ठीक है। फिर दोनों को कहीं दूर में एक गांव दिखा। और उस गांव में एक छोटी सी झोपड़ी में एक गरीब रहता था गुरु और शिष्य दोनों वह छोकरी के पास गए और दरवाजे पर दस्तक दिया मुझ गरीब ने दरवाजा खोलो गुरु ने देखा की वह बहुत ही गरीब है उसके घर में कुछ नहीं था तो गुरु ने उस आदमी से पूछा तुम्हारा नाम क्या है उसने उत्तर दिया मेरा नाम मोहन है और मैं बहुत ही गरीब हूं श्री गुरु जी पूछते हैं कि तुम गरीब क्यों हो फिर तुम्हारा घर कैसे चलता है उस गरीब ने बोला के उसके पास बहुत जमीन है लेकिन गांव वाले उसे बंजर कहते हैं कहते हैं कि वह जमीन कोई काम का नहीं है उसमें कोई फसल नहीं उगाया जा सकता और मेरे पास एक भैंस है जिससे मेरा घर का गुजारा होता है। इतना सुनकर गुरुजी सो गए फिर थोड़ी देर बाद जब सब सो गए तब गुरु जी अपने शीश को उठाकर उस गरीब की भैंस लेकर चल पड़ते हैं किसने बोला गुरूजी हमने यह अच्छा नहीं किया उस गरीब की रोजी-रोटी इसी में से चलती थी गुरु अपने शिष्य को देख कर मुस्कुराते और आगे बढ़ जाते हैं। करीब 10 साल बाद शिष्य बहुत बड़ा हो चुका था गुरु बन चुका था फिर वह सोचा की 10 साल पहले जिस गरीब का भैंस लेकर उनके गुरुओं ने गलत किया था उसका हालत ना जाने कैसा होगा उसके हालत देखने निकल पड़ता है जो वह गांव पहुंचता है तो वह देखते हैं कि जहां एक छोटी सी झोपड़ी हुआ करते थे वहां एक आलीशान महल बना है और जहां बंजर जमीन था वहां फल फूल का बगीचा है। इतने में ही उस बगीचे का मालिक आ जाता है सिर्फ उसे पहचान लेता है और उस आदमी को बोलता है कि तुम मुझे पहचाना मैं अपने गुरु जी के साथ आया था और हमने तुम्हारे यहां एक रात का मकान भी किया था वह आदमी शिष्य को पहचान लेता है और कहता है कि उस रात आप कहां चले गए थे उस रात से मेरा भैंस भी कहीं चली गई थी मेरे पास कोई रास्ता नहीं था तो मैंने अपने जमीन पर मेहनत की और काफी मेहनत के बाद उस पर फसल निकल आई। और आज मैं इस गांव का सबसे अमीर आदमी बन चुका हूं। यह सुनकर शिष्य के आंख में अपने गुरु के लिए आंसू आ गए उसे ये बात अब समझ में आई और वह रोने लगा।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमारे पास ही बहुत कुछ होता है लेकिन आप उसे देख नहीं पाते अगर उस पर ही मेहनत किया जाए तो हमारे पास बहुत कुछ आ जाएंगे।