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जिवन की सच्ची खुशी क्या होती है

जिवन की सच्ची खुशी क्या होती है

हम लोग बचपन से ही अकबर बीरबल के किस्से और कहानियां सुनते आए हैं और हमेशा उन दोनों की कहानियां बहुत ही रोचक होती है इसमें हमें सीखने को भी बहुत कुछ मिलता है अपनी कहानियों में से एक कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूं इसे आप समझ पाएंगे कि जिवन सच्ची खुशी क्या होती है
एक बार की बात है बादशाह अकबर के पास बहुत सोना- चांदी , हीरे -मोती थे उनके पास धन दौलत की कोई कमी नहीं थी जिसको दुनिया के सारे ऐसा- आराम वाली चीज मौजूद थी इससे वह बहुत ही खुश रहा था लेकिन एक दिन बादशाह अकबर देखते हैं कि उनके राजकोष में थोड़ा सा जगह बचा है और बाकी सब में सोना चांदी हीरे मोती से भरे हुए हैं अकबर के मन में एक विचार आया की इस राजकोष को पूरी तरह से सोने चांदी से भर दिया जाएगा तो उन्होंने पूरी जनता से टैक्स वसूल करना शुरू कर दिया लेकिन यह सब करने के बावजूद भी उनका राजकोष पूरी तरह से नहीं भर पाया राजकोट भरने के चक्कर में उन्होंने कई सेनाओं को अपने दरबार से निकाल दिया ताकि उनके कम पैसे खर्च हो और ज्यादा से ज्यादा उन्हें लाभ हो लेकिन यह सब करने से भी उनको राजकोष में कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा वह थोड़ा खाली ही था आप इसे भरने के बारे में बादशाह अकबर कुछ ना कुछ उपाय करते रहते थे लेकिन उनका सारा उपाय असफल हो जाता था क्योंकि वह काफी बड़ा राजकोष था और बादशाह अकबर उसे अपनी आंखों के सामने भरा हुआ देखना चाहते थे इसलिए वह बहुत ही चिंतित रहते थे रोज के रोज वह इसी चिंता में दिन बिताते थे कि उनका राजकोष कब भरेगा कुछ दिन होने बाद भी जब वह राजकोष नहीं भरा जब उन्हें चिंता सताने लगी और वह बहुत दुखी रहने लगे इस के चक्कर में उन्होंने खाना कम कर दिया तथा हंसना बोलना बंद कर दिया

 बादशाह अकबर का सहायक बीरबल

बीरबल को जब पता चला कि बादशाह अकबर चिंता में अपना खाना- पीना हंसना बोलना बंद कर दिया हैं तो मैं बहुत ही दुख हुआ और वह बादशाह अकबर की परेशानियों का पता लगाने गया बीरबल की बहुत कोशिश करने के बाद उससे पता चला कि महाराज की समस्या सोने चांदी से पूर्ण तरीके से राजकोष नहीं भरी हुई है तब उनके दिमाग में एक बहुत ही अच्छा विचार आता है

गरीब परिवार में खुशी

बीरबल बादशाह अकबर को अपने साथ एक गांव लेकर चले जाते हैं जहां पर एक गरीब परिवार रहता है उसके पास कोई भी धन या दौलत नहीं होती है वह रोज कमाता था और उसी पैसे से वह अपना घर भी चलाता था उस गरीबों के परिवार में तीन लोग रहते थे एक आदमी और उसकी पत्नी और उसका एक बच्चा रहता था तीनों ही बहुत ही प्रसन्न रहते थे क्योंकि उन्हें कोई भी चिंता नहीं थी वह रोज जाकर कमाकर पैसे कमाता और उसी पैसे से रोज अनाज खरीद कर खाता ना ही उसे पैसे जमा करने की चिंता थी और ना ही कोई मोटरी में भरने की। इसलिए वह हमेशा चिंता से दूर रहता था और एक हंसी खुशी जिंदगी जीता था बादशाह अकबर को यह सब देखकर बहुत ही हैरानी हुई है उसके पास कुछ नहीं है तो भी वह खुश है और मेरे पास इतना कुछ है तो भी मैं दुखी हूं बादशाह अकबर को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें
 बीरबल की समझदारी
बिरबल बादशाह अकबर को चिंता में देखकर बढ़िया शांत रहने को कहा और बोला जो मैं करता हूं बस आप वह देखते जाइए यह हंसता खेलता परिवार चिंता में दुबा देता हूं बीरबल ने बादशाह अकबर को योजना बताइ और अकबर के 95 सोने का सिक्का मांगा बादशाह अकबर ने बीरबल को सोने के सिक्के दे दिए उसके बाद बीरबल अपने योजना अनुसार उस गरीब परिवार के घर में जाकर चुपचाप 95 सोने के सिक्के रख देते हैं और वहां से लौट आते हैं उस गरीब परिवार की एक व्यक्ति की आंखें खुलती है तो वह देखता है कि एक पोटली उसके सामने रखा हुआ है उसके बाद वह व्यक्ति पोटली को खुलता है तो हैरान हो जाता है क्योंकि उसमें सोने के सिक्के भरे होते हैं और इतने सोने के सिक्का वह व्यक्ति कभी सपने में भी नहीं देखा था इसलिए वह काफी गंभीर हो गया और बाकी के सोने के सिक्के को गिनता है तो वह 95 सोने के सिक्के ही होते हैं हो सके तो अपने आंगन के जमीन के अंदर दवा देता है ताकि वह सुरक्षित रहें और वह यह बात अपने परिवार को नहीं बताता. उसके बाद उस गरीब व्यक्ति के मन में एक लालच उपतन होता है वह व्यक्ति सोचता है कि 95 सोने के सिक्के को 100 में कैसे बदलें इसके लिए वह चिंता में अपना सारा दिन – रात गुजार देता है लेकिन उसे 95 सोने के सिक्के को 100 में बदलने करने का कोई भी उपाय नहीं मीलता है उसके बाद वह दिन रात मेहनत करता और खून पसीना एक करता है और जुट जाता है अपना मकसद पूरा करने के लिए लेकिन वह गरीब इंसान उसी सिक्को को लाख कोशिश करने के बाद भी सो सिक्को मे बदल नहीं पाता है इसलिए वह चिंता में डूब जाता है और परेशान होते रहता है उसकी रातों की नींद उड़ जाती है अपना बेटे के साथ खेलना कूदना भूल जाता है और अपनी पत्नी और बच्चे से बात भी नहीं करता उसका परिवार वाले समझ नहीं पाते हैं कि जो व्यक्ति इतना हंसता खेलता था वह इतना चिंता में क्यों डूबा रहता है उस व्यक्ति की जिंदगी में केवल चिंता दुख तकलीफ हो जाती है
और अकबर और बादशाह बीरबल दोनों ही अपनी आंखों से यह सब देख रहे होते हैं और बादशाह अकबर को यह बात समझ में आ जाती है कि वे चिंता में क्यों रहते थे इसके लिए वह बहुत ही खुश थे और खुश होने के बाद बीरबल को इनाम भी उन्होंने दिया हाय उस गरीब व्यक्ति के पास जाकर सारा बात बता देते हैं कि उन्होंने ही कुछ पंचांग के सोने के सिक्के को रखा था ताकि बादशाह अकबर को अपने गलतियों का एहसास दिला सके उसके बाद अकबर उस व्यक्ति सोने के सिक्के मांग कर बादशाह अकबर को वापस दे देते हैं
 इस कहानी से क्या- क्या सीखना है
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है कि जिंदगी में चाहे जितना भी हम अमीर आदमी बन जाए जरूरी नहीं है कि अमीरी हमें सच्ची खुशी दे. सच्ची खुशी पाने के लिए जरूरी नहीं होती है कि हमारे पास धन दौलत दुनिया की एसो-अराम वाली सभी चीजें हमारे पास उपलब्ध होनी चाहिए सच्ची खुशी पाने के लिए हमें यह सब की आवश्यकता नहीं होती है बल्कि सच्ची खुशी पाने के लिए केवल मन में संतुष्टि होनी चाहिए जिससे की हम और अधिक लालच ना करें और हमारा मन ही व्याकुल ना हो और हम शांति और संतुष्टि से जी पाए यही होती है जीवन की सच्ची खुशी।