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बाज के जीवन की कहानी|baaz ki jivan

पक्षियों के जीवन बारे में आप तो जानते ही होंगे लेकिन हम आपको आज उस पक्षी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका जीवन बहुत ही संघर्ष और कष्ट वाला होता है वह पक्षी कोई और नहीं बल्कि बाज है बाज एक ऐसा पक्षी है जो कि विभिन्न पक्षियों के तुलना से इसका जिवन बहुत ही ज्यादा अलग होता है आप लोग में से बहुत कम लोग ही बाज के जीवन के बारे में सुने होंगे आज हम आपको बाज के जीवन के बारे में बताएंगे किस तरह होता है एक बाज की जीवन। इस कहानी को पढ़कर आप अपने जीवन को बदल सकते हैं और जीवन में कुछ अनोखा काम कर सकते हैं जिससे दूसरे से आपका जीवन सफल और सबसे अलग हो।

Table of Contents

बाज का बचपन

बाज का जीवन बचपन से ही बहुत ही ज्यादा संघर्षकारी होते हैं जिसके कारण वह सबसे अलग होता है और पक्षियों का सबसे खतरनाक प्रजाति होता है जीवन रेखा करीब 70 साल तक होता है।
मादा बाज अपने बच्चे को बचपन से ही ट्रेनिंग देना शुरू कर देते हैं जिससे कि वह एक बेहतर शिकारी बन सके  मादा बाज अपने बच्चे को जब वह कुछ दिनो दिन भर तक खाना लाकर देती है लेकिन जब वह थोड़ा-थोड़ा बोलना शुरू करती है तब से ही उसे अपना खाना खुद से जुगाड़ करना पड़ता है और वह कुछ दिनों तक ऐसा ही ट्रेनिंग देते हैं उसे छोटे-मोटे शिकार शिखाया जाता है किरो मकोड़ों को खाने के लिए। उसके बाद वह होता है जिसे आप सोचने पर विवश हो जाएंगे कि एक माता पिता अपने बच्चे के साथ ऐसा कैसे कर सकता है जब बाज के बच्चा जब वह ठीक से चल भी नहीं सकते तब उन्हें अपने पंजों से पकड़कर आसमान के दूरी पर जाकर उसे वही से नीचे की तरफ छोड़ दिया जाता है आप लोग सोच रहे होंगे कि बच्चे तो मर जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं है लेकिन मादा बाज अपने बच्चे को ऐसा इसलिए करती है ताकि उस बच्चे के मन से आसमान की दूरी का डर खत्म कर सके और वह उड़ना सीख जाऐ। या ट्रेनिंग तब तक दी जाती है जब तक कि बाज अच्छे से उड़ना सीख ना जाए। इस तरीके से एक माता बाज अपने बच्चों का डर खत्म करती है और उसे एक शानदार शिकारी बनाती है जो पक्षियों की दुनिया पर राज करता है

 अन्य पक्षी के तुलना

एक बात का जीवन रेखा अन्य पक्षियों के तुलना बहुत ज्यादा होती है बाज सभी पक्षियों के तुलना उसमें ज्यादा हिम्मत और ताकत होती है  बाज अपने से अधिक वजन को लेकर उड़ सकता है जब बारिश होता है तब सभी पक्षीयो तथा जीव-जंतु धरती के नीचे छुपने की जगह खोजते रहते हैं  दूसरी ओर बाज अपने बड़ी-बड़ी पखियों से तेज रफ्तार में बादलों को चीरते हुए बादलों के ऊपर उड़ान भरता है और वह जब तक उड़ान भरता है तब तक की बारिश ना रुक जाए इस तरह से होती है एक बाज की सोच अन्य पक्षियों की तुलना।

बाज का शिकार

 बाज के ‌शिकार में ज्यादातर लोमड़ी, खरगोश हिरन,मछलीयां, सांप आदि छोटे-छोटे जानवरों होते हैं बाज शिकार करने से पहले वह पूरी तैयारी कर लेता है की शिकार कितनी दूरी पर है उसे किस तरह से पकड़ना है बाज का पंजा इतना खतरनाक होता है कि किसी के अंदर घुसने के बाद उसका गुरदा फाड़ देता है उससे बचना असंभव होता है बाज का रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटे होता है और अपने शिकार को 15000 फीट की ऊंचाई के दूर से ही भाप लेंता है तब उसके निगाहें केवल लक्ष्य पर होती है और वार‌ करते समय कभी भी इधर-उधर नहीं देखता सीधे अपने शिकार को देखता है और पलक झपकते ही अपने शिकार को ले उड़ जाता है कभी-कभी वह अपने से बड़े और भारी जानवरों का भी शिकार करता है बड़े-बड़े जानवरों को वह ऊंचाई में ले जाकर उसे नीचे की तरफ गिरा देते हैं जिससे उसका बचना असंभव हो जाता है  बाज जब अपने शिकार को खाता है तो किसी भी पक्षी या जानवर के हिम्मत तक नहीं होते कि उससे उसका शिकार छीन ले कर कोई ऐसा गलती कर देता है तो उसे भी बाज का शिकार बनना पड़ता है बाज से उलझने की शायद ही कोई गलती करता है और जो कर देता है उसे बाज जिंदा नहीं छोड़ता है बाज अपने दुश्मनों को बहुत ही बत्तर तरीके से मौत देता है

 बाज का 35 वर्ष बाद की स्थिति

 जब बाज का 35 वर्ष हो जाता है तब बाज के शरीर का अंग धीरे-धीरे जरूरत से अधिक बड़ी हो जाती है जिसके बाद वह कोई भी ‌काम‌ नहीं कर पाता है उसे पिंडा होना सुरू‌ हो जाती है उसकी चोंच धीरे-धीरे लंबी होते-होते मोड़ जाती है जिसके कारण व शिकार नहीं कर पाता है और और उसे दर्द उत्पन्न होने लगता है पंजों के नाखून बड़ी होकर मुड़ जाती हैं जिस पंजों से वह शिकार को द बेचता था अब वह पंजा उससे किसी काम का नहीं रह जाता और उसमें हमेशा पीड़ा होती रहती है बाज के जगह अगर कोई दूसरा पक्षी होता तो शायद हिम्मत हार जाता या डरकर मर जाता लेकिन बाज एक हिम्मत वाज पंक्षी है वह समस्या को देखकर डरने या मरने का विचार नहीं करता बल्कि उसे मुकाबला करने का विचार करता है जब बाज का चोंच बड़ा हो जाता है तब दर्द होने के बावजूद अपने चोंच पत्थर में मार – मार कर तोड़ देता है ताकि उसकी नया चोंच तैयार हो सके और वह फिर से शिकार कर सके.
और अपने बड़े तथा भारी पंखियो को चोंच से खींच-खींच कर हल्का कर लेता है ताकि वह अपने पहले जैसी उड़ान भर सके और इसके बाद अपने बड़े-बड़े नाखूनों को पत्थर में रगड़  रगड़कर तोड़ देता है ताकि वह अपने शिकार को अपने पंजों से पकड़ सके. इस तरह से होता है एक बाज की जिंदगी वह जीवन में कभी भी हिम्मत नहीं हारता है और इसी तरह अपनी समस्याओं का सामना करता है और अपना जीवन को गर्व से जीता है।

बाज कहानी की सिख

इस कहानी से हम सबसे पहले यह बात सीख सकते हैं कि जीवन में कभी भी हमें भावुक होकर फैसला नहीं लेना चाहिए और हमें कभी भी आरामदायक जीवन नहीं जीना चाहिए जिवन में हमें हमेशा कठिन रास्ते पर चलना चाहिए होता है किंतु हमारे जीवन में सबसे लाभदायक वही होता है और यही फैसला हमें सबसे अलग और बेहतरीन बनाता है
बाज से हम दूसरी बात यह सिख सकते हैं कि जिंदगी में कभी भी दूसरों को देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए अपना फैसला खुद लेना चाहिए और पूरी सोच समझ कर लेनी चाहिए और फैसला हमेशा बड़ी होनी चाहिए तभी आप जिंदगी में कुछ बड़ा बना कर सकते हैं किस तरह से बाज बारिश के मौसम में बादलों के ऊपर अपनी उड़ान भरता है ना कि दूसरे चिड़िया को देखकर वह कोई छुपने की जगह खोजता है
तीसरी बात हम यह सिख सकते हैं कि बाज शिकार करने से पहले अपनी पुरी तैयारी कर लेता है शिकार कहां है कितनी दूरी पर है उसे किस तरह तरह से शिकार करना है लास्ट में जब वह शिकार करता है तो अपना आंख एकाग्रता कर शिकार पर वार करता है और शिकार को इस तरह दबोच लेता है कि उससे छुटना असंभव है अपने से बड़े से बड़े शिकार को ले उड़ जाता है बाज की तरह आप भी अपनी तैयारी पूरी रखें कोई भी काम करने से पहले और पुरी एकाग्रता से करिए तभी आपका कार्य सफल होगा
चौथी बात हम यह सीख सकते हैं बाज जिस तरह शिकार करने में प्रसिद्ध है उसी तरह आप भी अपने जीवन में कोई भी काम में महारथी हासिल करना सीखिए दुनिया आपको सम्मान देगी और आपका कार्य में सफलता पुरवक होगा ।
जब बारिश होता है तो बाज अन्य पशुओं की तुलना बादल के ऊपर उड़ता है उसी तरह आप अपनी समस्याओं से ऊपर उठिये