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यकीन की ताकत

यकीन की ताकत​ | Yakeen ki takat

यकीन की ताकत

 यह कहानी है एक पिता और उसके बच्चे की  पिता ने अपने बच्चे की किस तरह से  यकीन की ताकत समझा दिया और बताया जीवन में जो तुम करते हो बदले में उसी का फल तुम्हें मिलता है यह कहानी पढ़कर आप लोगों को या यकीन हो जाएगा कि जो हम दूसरे के लिए करते हैं वही हम दूसरों से पाते हैं
एक बार की बात है एक छोटे से गांव में एक आदमी रहता था उसके घर के पास पहाड़ था जहां वह हर रोज सुबह जाता था और उस पहाड़ के ऊपर वह थोड़ी देर बैठता और वापस घर चला जाता। एक दिन रोज की तरह हुआ सुबह-सुबह पहाड़ के पास जा रहा था पीछे से  उसका छोटा बेटा आया और उसका हाथ पकड़ लिया और कहा आज मैं भी आपके साथ चलूंग. फिर वह अपने बेटे को समझाया कर अपने बेटे को उसके साथ पहाड़ पर चढ़ने से मना कर दिया और कहा कि जहां वह जा रहा है वहां का रास्ता बहुत छोटा और चढ़ाई बहुत ज्यादा है  तुम मेरे साथ नहीं चढ़ पाओगे. फिर उसके बेटे ने बहुत जीद करने लगा  उसके पिता ने उसे बहुत समझाया लेकिन उसने जिद नहीं छोड़ी तो उसके पिता को उसको अपने साथ ले जाना ही पड़ा.

पहाड़ पर चढ़ते समय

दोनों पहाड़ पर चढ़ने लगे पिता ने बेटे का हाथ कस कर  पकड़ा हुआ था बाएं में पहाड़, और दाएं में खाई और रास्ता भी बहुत छोटा था वे दोनों चढ़ते चढ़ते पहाड़ की चोटी पर पहुंचने ही वाले थे तभी रास्ते में एक बड़ा पत्थर आया। पिता को रोज आने से उससे पहले से ही पता था कि उस जगह के पत्थर के बारे में तो वह साइड से निकल गया लेकिन उसका बेटे को नहीं पता था बेटा का ध्यान कहीं और होने के कारण उसका घुटना पत्थर पर जा टकराया। फिर उस बच्चे के मुंह से चीख निकली और उसका चीख से चारों ओर गुज़ने लगे इस से पहले उस बच्चे ने कभी भी आवाज की गूंज नहीं सुना था। और उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह कौन बोल रहा है?
वह थोड़ा घबरा गया वह सोचा कि कोई है जो उसे छुप कर देख रहा है और उसका मजाक उड़ा रहा है फिर उस बच्चे ने बोला कौन हो तुम? फिर आवाज गुंजा और उसको गुंजा आवाज को सुनकर बच्चे को बहुत गुस्सा आ गया उसे लगा कौन है जो लगातार उसका मजाक उड़ाया जा रहा है. फिर उसने गुस्से से कहा मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं फिर गूंज कर आवाज वापस आया वह बहुत घबरा गया उसके पिता समझ गए थे कि उसके साथ क्या हो रहा है और उस बच्चे ने अपने पिता का हाथ डर कस कर पकड़ लिया था और पूछा कि वह कौन है? जो उसे तंग कर रहा और डरा रहा है तो उसके पिता थोड़ा सा मुस्कुराए। और खाई के तरफ देखा और बोलो मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं बच्चा हैरान हो गया वही इंसान जो उसका मजाक उड़ा रहा और तंग कर रहा है उसके पिता को बोल रहा है मैं तुमसे प्यार करता हूं. उसका पिता उस देखकर समझ गए कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है अपने बच्चे को खुश करने  और समझाने के लिए फिर दोबारा खाई के तरफ बोला तुम बहुत अच्छे हो फिर आवाज गुंजाकर वापस आया तुम बहुत अच्छे हो यह सुनकर उसके बेटे ने मुस्कुराया और पूछा आपने से पिता से कि यह क्या हो रहा है. जो इंसान थोड़ी देर पहले उसका मजाक उड़ा रहा था और वह अभी बोल रहे हैं तुम बहुत ही अच्छे हो और लड़का बहुत ही ज्यादा उलझा हुआ था

 पिता ने समझाया

लेकिन उसके पिता ने समझाया कि यह आवाज जो तुम सुन रहे हो ना वह किसी और का नहीं तुम्हारा ही आवाज है जो पहाड़ों में गूंज रही है तुम्हें अपनी ही आवाज सुनाई दे रही है जैसा तुम बोलते ठीक वैसे ही तुम्हें सुनाई देता है अगर तुम गुस्से से कुछ कहोगे तो पलटकर जो आवाज आएगी उसमें भी गुस्सा होगा। लेकिन तुम कुछ अच्छा कहोगे तो वह आवाज भी अच्छी होगी फिर उस बच्चे सारी बात समझ में आ गई कि उसके साथ क्या हो रहा था की जब उसने गुस्से से बात की तो सामने से गुंजा हुआ आवाज में भी गुस्सा था  और जब उसने अच्छी बात की तो लौटकर आने वाला आवाज भी अच्छी थी । दो उस उस लड़के को यकीन हो गया था उसे जीवन में सभी के साथ अच्छे से रहना है तभी उसके साथ अच्छा होगा. और वह अपने दोनों हाथ खोला औरा जोर से हंस कर कहा कि मैं बहुत खुश हूं।

इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है

 इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जैसा हम बोलते हैं जीवन में वैसे ही पाते हैं अगर हम किसी के लिए बुरा बोलते हैं तो हमारे लिए बुरा ही करता है और अच्छा करते हैं तो वह भी हमारे साथ अच्छे करता है स्टारमेजिक हमें कभी भी किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए और हमेशा सबके साथ अच्छे से रहना चाहिए ताकि वह भी हमारे साथ अच्छा व्यवहार कर सकें अगर आप इस बात पर यकीन करते हैं तो आपको साथ कभी भी जीवन कोई भी बुरा नहीं करेगा बस आपको अपने आप पर यकीन रखना