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सही निर्णय कैसे ले

सही निर्णय कैसे ले l Shi nirnai kese le

सही निर्णय कैसे लेl

एक राजा था जिसका तीन बच्चे थे वह राजा बहुत चिंतित रहता था क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा था कि तीनों बच्चों में से वह उसी को राजा बनाना चाहता था जो ठीक से निर्णय ले सके एक दिन राजा ने अपने तीनों बच्चों को बुलाया और उन्हें दिनों से एक बात पूछा। अगर कोई अपराधी उसके राज सभा में आ जाता है तो उस अपराधी को क्या दंड दोगे पहले लड़के ने उत्तर दिया मैं उसे मृत्युदंड दे दूंगा जिससे वह दोबारा कोई भी गलत काम करने का प्रश्न ही ना हो। और इससे दूसरों को सीख मिलेगा कि गलत काम का अंजाम क्या होता है और कोई भी गलत काम नहीं करेगा।
राजा ने अपने दूसरे बच्चे से प्रश्न का उत्तर मांगा बच्चे ने उत्तर दिया कि वह उसके हाथ पैर कटवा देगा जिससे उसे जीवन भर का अफसोस रहे कि गलत काम नहीं करना चाहिए । वह अपने अपराध का दंड जिंदगी भर भुगतेगा और उसे देखकर दूसरों के सीख मिलेगा कि कोई भी अपराध करने से पहले कोई भी सौ बार सोचेगा।
राजा ने यही सवाल अपने तीसरे बेटे से पूछा। तीसरे बेटे ने कहां पिताश्री इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं एक राजा था जिसका पास एक गौरैया थी गौरैया ने जीवन भर राजा का सेवा की। लेकिन एक दिन गोरिया के पास पत्र आया कि उसका मां बीमार है वाह राजा से अनुमति लेकर अपने मां के पास मिलने चली गईं। कुछ दिन हो गए गोरिया को वापस राजा के पास जाना था। गोरिया जैसे ही वहां से रवाना हुई रास्ते में एक फल का पेड़ दिखा। उस पेड़ के बारे में गौरैया सुन रखी थी कि यह पेड़ का फल जो खाता है वह अमर हो जाता है उसने अपने राजा के लिए एक फल तोर लिया फिर वहां से गोरैया निकल पड़ी रास्ते में वह थक चुकी थी उसने सोचा कि किसी पेड़ के नीचे आराम कर लिया जाए वह पेड़ के नीचे बैठ गई और वही फल को रख दी उसे बहुत जोरो से नींद आ गया कुछ देर के लिए सो गई वहां पर एक सांप आया और उसने उस फल को जूठा कर दिया गोरैया नींद से जागती ही वहां से रवाना हो जाती है और वह फल जाकर राजा को दे देती है और कहती है या फल खाते ही आप अमर हो जाइगा। तभी वह फल एक कुत्ता खा लेता है और वह मर जाता है राजा क्रोध में आकर उस गौरैया को यह बोलकर मृत्युदंड दे देता है कि वह राजा का प्राण लेना चाहती थी गौरैया को सफाई में कुछ कहने का भी मौका नहीं मिलता है।
वह जहरीला फल का बीज जहां फेंका गया थ। वहां एक बड़ा सा फल का पेड़ उग जाता है जिसे राजा सब खाने से मना कर देता है। कि वह पेड़ का फल जहरीला है। एक दिन एक औरत वहां से गुजर रही होती है उससे वह पेड़ के बारे में जानकारी नहीं होती है और उस पेड़ का फल खा लेती है।
वह कुछ ही दिनों में वह औरत धीरे-धीरे जवान होना शुरू हो जाती है यह यह बात पूरे गांव में फैल जाती है फैलते फैलते यह बात राजा के पास पहुंच जाता है राजा को फिर अपनी गलती का एहसास होता है। कि उसने कितनी बड़ी गलती की थी उस गौरैया को मरवा कर। फिर तीसरा बच्चे राजा से कहते हैं की चाहे जो भी अपराधी हो मैं उसे अपनी सफाई में बोलने का मौका अवश्य दूंगा और जब तक यह सिद्ध नहीं हो जाता कि वह एक अपराधी है जब तक मैं उससे कोई भी डंड नहीं दूंगा राजा यह उत्तर सुनकर वह बहुत खुश होता है और अपने पुत्र को गले लगा लेता है और उसे राजा बना देते हैं।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कोई भी कार्य जल्दबाजी या बिना सोचे समझे नहीं करना चाहिए नहीं तो जीवनभर का भी पछताना हो सकता है।

जादुई कुआं