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सही निर्णय कैसे ले l Shi nirnai kese le

सही निर्णय कैसे लेl

जिवन‌ में सही निर्णय किस प्रकार लेl

एक राजा था जिसका तीन बच्चे थे तीनों विभिन्न प्रकार के गुणों वाले थे वैसे तो राजा बहुत खुश रहता था लेकिन उस राजा को बहुत चिंतित रहता था क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा था कि अपने तीनों बच्चों में से किसको राजा बनाएं. क्योंकि तीनों बच्चों में से किसी एक को ही राजा बनने का जिम्मेदारी देना चाहता था जो की बूरी से बूरी परिस्थिति में भी सही से निर्णय ले सके.  एक दिन राजा बहुत चिंतित नजर आ रहा था राजा के मंत्री राजा से पूछते हैं क्या हुआ महाराज राजा उत्तर देते हुए अपने सारी परेशानियों को मंत्री के सामने रखता है मंत्री बहुत ही बुद्धिमान होता है‌ इसलिए उसे राजा के चिंता समझकर राजा को उसका हल बताया राजा ने ठीक वैसे ही किया जैसा मंत्री ने कहा अपने तीनों बच्चों को बुलाया और उन्हें दिनों से एक बात पूछा। अगर कोई व्यक्ति के घर में चोरी होती है और वह चोर को पकड़ कर राज सभा में उपस्थित कर देगा बिना किसी सबूत के तो उस अपराधी को क्या डांड मिलना चाहिए यह प्रश्न राजा के तीनों बच्चों ने सुनकर अपने उत्तर देना शुरू किया
 पहले बेटा से प्रश्न
पहले लड़का जोकि बहुत बड़ा योद्धा था और वह केवल हिंसा का ही बात करते रहता था वाह हमेशा क्रोध में ही रहता था इसके कारण वह कोई भी निर्णय जल्दबाजी एवं गुस्से में लेता था अपने पिता के पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए उसने कहा कि वह उसे मृत्युदंड दे देगा जिससे वह दोबारा कोई भी गलत काम करने का प्रश्न ही ना हो। और इससे दूसरों को सीख मिलेगा कि गलत काम का अंजाम क्या होता है और कोई भी गलत काम नहीं करेगा और इससे प्रजा में सुख एवं शांति बनी रहेगी। आज आपने पहले बेटे का उत्तर सुनकर नाखून दिखाई देते हैं उसके बाद उन्होंने अपने दूसरे बेटे से प्रश्न किया

दूसरे बेटे से प्रश्न

राजा ने अपने दूसरे बच्चे से प्रश्न का उत्तर मांगा राजा के दूसरे बेटे समझदार तो था लेकिन उसके साथ साथ वह बहुत ही लालची‌ भी था वह हमेशा ध्यान इसे अपने राजकोष भरना चाहता था इसीलिए बच्चे ने उत्तर दिया कि वह उसके हाथ पैर कटवा देगा जिससे उसे जीवन भर का अफसोस रहे कि गलत काम नहीं करना चाहिए । वह अपने अपराध का दंड जिंदगी भर भुगतेगा और उसे देखकर दूसरों के सीख मिलेगा कि कोई भी अपराध करने से पहले कोई भी सौ बार सोचेगा। उसके बाद चोरी हुए सामानों को कुछ अपने राजकोष में और कुछ उस व्यक्ति को दे देगा जिसके घर से चोरी हुआ था इससे दोनों का भी इंसाफ हो जाएगा और हमारा भी फायदा हो जाए. राजा अपने दूसरे बेटे का उत्तर सुनकर निराश हो गया राजा को अपने दूसरे बेटे का उत्तर पसंद नहीं आया

 तीसरे  बेटा से ‌सवाल

राजा ने यही सवाल अपने तीसरे बेटे से पूछा वह बहुत ही प्रेम करता था किसकी वह वीर योद्धा के साथ साथ बहुत बुद्धिमान भी था तीसरे बेटे ने कहां पिताश्री इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं एक राजा था जिसका पास एक गौरैया थी गौरैया ने जीवन भर राजा का सेवा की। लेकिन एक दिन गोरिया के पास पत्र आया कि उसका मां बीमार है वाह राजा से अनुमति लेकर अपने मां के पास मिलने चली गईं। कुछ दिन हो गए गोरिया को वापस राजा के पास जाना था। गोरिया जैसे ही वहां से रवाना हुई रास्ते में एक फल का पेड़ दिखा। उस पेड़ के बारे में गौरैया सुन रखी थी कि यह पेड़ का फल जो खाता है वह अमर हो जाता है उसने अपने राजा के लिए एक फल तोर लिया फिर वहां से गोरैया निकल पड़ी रास्ते में वह थक चुकी थी उसने सोचा कि किसी पेड़ के नीचे आराम कर लिया जाए वह पेड़ के नीचे बैठ गई और वही फल को रख दी उसे बहुत जोरो से नींद आ गया कुछ देर के लिए सो गई वहां पर एक सांप आया और उसने उस फल को जूठा कर दिया गोरैया नींद से जागती ही वहां से रवाना हो जाती है और वह फल जाकर राजा को दे देती है और कहती है या फल खाते ही आप अमर हो जाइगा। तभी वह फल एक कुत्ता खा लेता है और वह मर जाता है राजा क्रोध में आकर उस गौरैया को यह बोलकर मृत्युदंड दे देता है कि वह राजा का प्राण लेना चाहती थी गौरैया को सफाई में कुछ कहने का भी मौका नहीं मिलता है।
वह जहरीला फल का बीज जहां फेंका गया थ। वहां एक बड़ा सा फल का पेड़ उग जाता है जिसे राजा सब खाने से मना कर देता है। कि वह पेड़ का फल जहरीला है। एक दिन एक औरत वहां से गुजर रही होती है उससे वह पेड़ के बारे में जानकारी नहीं होती है और उस पेड़ का फल खा लेती है।
वह कुछ ही दिनों में वह औरत धीरे-धीरे जवान होना शुरू हो जाती है यह यह बात पूरे गांव में फैल जाती है फैलते फैलते यह बात राजा के पास पहुंच जाता है राजा को फिर अपनी गलती का एहसास होता है। कि उसने कितनी बड़ी गलती की थी उस गौरैया को मरवा कर।
अपनी कहानी सुनाने के बाद तीसरा बेटा राजा से कहते हैं की चाहे अपराधी मैं ने जो भी अपराध किए मैं उसे अपनी सफाई में बोलने का मौका अवश्य दूंगा और जब तक यह सिद्ध नहीं हो जाता कि वह एक अपराधी है जब तक मैं उससे कोई भी डंड नहीं दूंगा राजा यह उत्तर सुनकर वह बहुत खुश होता है राजा को अपने खिचड़ी बेटे से सही उत्तर गया और तीसरे अपने पुत्र को गले लगा लेता है और उसे राजा बना देते हैं।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कोई भी कार्य जल्दबाजी या बिना सोचे समझे नहीं करना चाहिए पूरा जीवनभर का पछतावा हो सकता है कभी भी हमें बिना सोचे समझे फैसला नहीं लेना चाहिए खासकर कोई बड़ी मकसद के लिए फैसला ले रहे हो।